चकित न हों - मुझे पता है भारत की जीडीपी वृद्धि दर
विश्व में फिलहाल सर्वाधिक है (चीन से भी अधिक) और अनेक अंतर्राष्ट्रीय निकाय हमें
शाबाशी दे रहे हैं. हमारे आर्थिक सर्वेक्षण 2016 एवं बजट 2016-17 में भी इस आधार पर
अनेक योजनागत विश्लेषण व अनुमान लगाये गए हैं. अच्छा है, जीडीपी का परिमाण बढ़ना ही
चाहिए अन्यथा हर साल सुरसा के मुंह की भांति बढ़ रही हमारी आबादी खपेगी कहाँ,
नौकरियां आएँगी कहाँ से और प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी कैसे. ये सब तो ठीक है, किन्तु
हमारी पूरी व्यवस्था 5 ऐसी बीमारियों से ग्रसित हो गई है जिनका इलाज नहीं हुआ तो
वृद्धि के लाभ केवल कागज़ों पर रह जायेंगे.
प्रसिद्ध चिंतक प्रोफेसर एंगस मेडिसन ने अपने अध्ययन से ये सिद्ध किया कि ऐतिहासिक रूप से भारत और चीन विश्व के सर्वाधिक समृद्ध देश रहे हैं. इन दोनों का जीडीपी विश्व के कुल का साठ प्रतिशत से अधिक हुआ करता था. प्रसिद्ध पत्रिका द इकोनॉमिस्ट ने इस चित्र के ज़रिये इस सच्चाई को बताया -
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विश्व इतिहास का अदभुत सच |
किन्तु जैसा हम जानते हैं, और जी रहे हैं, आज की स्थिति बिलकुल उलट है.